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Share Market News : विदेशी निवेशकों ने बाजार से खींचा पैसा, 16 दिनों में 1 लाख करोड़ बाहर

 

Share Market News : विदेशी निवेशकों ने बाजार से खींचा पैसा, 16 दिनों में 1 लाख करोड़ बाहर



भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ हफ्तों से एक बड़ा ट्रेंड दिख रहा है, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. विदेशी निवेशक तेजी से पैसा निकाल रहे हैं और इसका असर सीधे बाजार पर नजर आ रहा है. हालात ऐसे हैं कि सिर्फ 16 ट्रेडिंग दिनों में ही करीब 1 लाख करोड़ रुपया बाहर चला गया. अगर इसे आसान भाषा में समझें तो हर घंटे करीब 1,000 करोड़ बाजार से निकल रहा था. यह सब उस वक्त हो रहा है जब US-ईरान-इजरायल तनाव बढ़ा है और क्रूड ऑयल महंगा होता जा रहा है, जिससे भारत की इकोनॉमी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.

26 फरवरी से 20 मार्च के बीच विदेशी निवेशकों ने कुल 1,00,040 करोड़ रुपए निकाल लिए. साल 2026 में अब तक 50 ट्रेडिंग सेशंस हो चुके हैं, जिनमें से 33 दिन ऐसे रहे जब विदेशी निवेशकों ने लगातार पैसा बाहर निकाला. यह ट्रेंड नया नहीं है. 2025 में भी उन्होंने 2.4 लाख करोड़ निकाले थे और 2024 में 1.29 लाख करोड़. यानी पिछले कुछ सालों से उनका रुख यही बना हुआ है.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके पीछे कई वजहें हैं. सबसे बड़ी वजह है महंगा होता क्रूड ऑयल और रुपये की कमजोरी. इसके अलावा ग्लोबल निवेश अब दूसरी जगहों पर शिफ्ट हो रहा है. हेड ऑफ ट्रेजरी एंड एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स, LLP अनिल कुमार भंसाली के मुताबिक आजकल पैसा वहां जा रहा है जहां जल्दी रिटर्न मिल रहा है, जैसे US, UK, यूरोप, कोरिया, चीन और जापान. वहीं भारत का बाजार अभी थोड़ा महंगा लग रहा है. साथ ही AI और क्रिप्टो जैसे नए सेक्टर्स भी निवेश को अपनी ओर खींच रहे हैं.


इसका असर विदेशी निवेशकों के कुल निवेश पर भी पड़ा है. 15 मार्च तक उनके पास मौजूद एसेट्स घटकर 65.63 लाख करोड़ रुपए रह गए, जो 13 महीने का सबसे निचला स्तर है. उनकी हिस्सेदारी भी घटकर 15.3 फीसदी रह गई है. एक महीने पहले यह 15.5 फीसदी और एक साल पहले 16.3 फीसदी थी. SBI सिक्योरिटीज के सनी अग्रवाल के मुताबिक रुपए की गिरावट ने नुकसान को और बढ़ा दिया है. उनका कहना है कि जब रुपया कमजोर होता है, तो विदेशी निवेशकों को दो तरफ से नुकसान होता है, एक बाजार में गिरावट और दूसरा करेंसी का असर. इससे वे और तेजी से पैसा निकालते हैं.

हालांकि, इस दौरान घरेलू निवेशकों ने मजबूती दिखाई. उन्होंने इसी अवधि में रिकॉर्ड 1,16,586 करोड़ रुपए बाजार में डाले, यानी हर घंटे करीब 1,200 करोड़. इसमें SIP, इंश्योरेंस और पेंशन फंड का बड़ा रोल रहा. इसके बावजूद बाजार गिरावट से नहीं बच सका. सेंसेक्स और निफ्टी 10 फीसदी से ज्यादा नीचे आए, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी करीब 7 से 8 फीसदी तक फिसल गए. अब नजर इस बात पर है कि ग्लोबल हालात कब सुधरते हैं और क्रूड ऑयल की कीमतें कहां जाती हैं. तभी तय होगा कि विदेशी पैसा वापस आता है या नहीं.


⚠️ Disclaimer

यह कंटेंट केवल सूचना के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय अवश्य लें।

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